अध्याय 15

आख़िर में उसने कुछ नहीं कहा। बस चुपचाप वहीं खड़ा रहा, जैसे अमेलिया के मुझ पर किए गए वार को बिना कुछ बोले स्वीकार कर रहा हो।

उसके लिए मेरे मन में बची-खुची, बेहद फीकी और हास्यास्पद-सी उम्मीद भी पूरी तरह टूट गई।

उसी अटपटी और घुटन भरी ख़ामोशी में, किसी का गर्म हाथ हल्के से मेरे कंधे पर आ टिका।

एंड्रय...

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